Thursday, August 22, 2019

महिला क्रिकेट टीम को कॉमनवेल्थ गेम्स से क्या हासिल होगा?

कॉमनवेल्थ खेलों में अब तक एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग और डाइविंग जैसे खेल देखने को मिलते थे. लेकिन अब इन खेलों में टी-20 क्रिकेट का रोमांच भी देखने को मिलेगा.

वर्ष 2022 में बर्मिंघम में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों में महिला क्रिकेट को भी शामिल किया जा रहा है. इसमें भारतीय महिला क्रिकेट टीम भी टी-20 मुक़ाबले में हिस्सा लेगी.

भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में ये पहली बार होगा कि महिला खिलाड़ी भी कॉमनवेल्थ खेलों में अपना हुनर दिखा पाएंगी.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम 1976 में पहला अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच खेलने के बाद से अब 2022 में उन्हें कॉमनवेल्थ खेलों में ये मौक़ा दिया गया है.

वर्ष 1998 में कॉमनवेल्थ खेलों में एक बार पहले भी भारतीय क्रिकेट टीम को भेजा गया था लेकिन तब सिर्फ़ पुरुष टीम ही इसका हिस्सा बनी थी. उस समय वनडे मैच खेले गए थे.

अगले कॉमनवेल्थ खेलों में भारत सहित आठ देश मुक़ाबले में उतरेंगे. इसमें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मज़बूत टीमें भी होंगी.

लेकिन, इस बार सिर्फ़ महिला टीम को ही कॉमनवेल्थ खेलों में शामिल किया जा रहा है. पुरुष टीम इसका हिस्सा नहीं है.

ऐसे में अपनी पहचान के लिए संघर्ष करती महिला क्रिकेट टीम के लिए कॉमनवेल्थ खेलों में शामिल होने का ये मौक़ा ख़ास क्यों है और वो इस मंच से क्या हासिल कर पाएंगी?

वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन इसे महिला क्रिकेट टीम के लिए एक बहुत अच्छा मौक़ा मानते हैं.

वह कहते हैं, "कॉमनवेल्थ खेलों से महिला खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय पहचान पाने का एक बड़ा मौक़ा मिलेगा. पूरी दुनिया की इन खेलों पर नज़र होती है, उसकी लाइव कवरेज़ की जाती है. अगर इसमें भारत जीत गया तो भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए ये एक अच्छा एक्सपोजर होगा. हालांकि ये थोड़ा मुश्किल है क्योंकि उनका मुक़ाबला इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों से भी होने वाला है."

भारत में महिला क्रिकेट अस्तित्व में आने के कई दशकों बाद ये फ़ैसला लिया गया है. प्रदीप मैगज़ीन मानते हैं कि अब महिला क्रिकेट पर गंभीरता से सोचा जा रहा है.

लंबे समय तक भारत में महिला और पुरुष क्रिकेट के लिए अलग-अलग एसोसिएशन हुआ करती थीं. महिला क्रिकेट, वुमन्स क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के तहत संचालित होता था जिसका गठन 1973 में हुआ था. बताया जाता है कि इसके भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई में मिलने के बाद से महिला क्रिकेट की स्थिति में सुधार हुआ है.

प्रदीप मैगज़ीन ने बताया, "महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने फ़ैसला किया था कि महिला और पुरुष क्रिकेट जहां भी होता है उसे एक ही बोर्ड चलाएगा. इसी के तहत महिलाओं की एसोसिएशन को साल 2006 में बीसीसीआई में मिला दिया गया."

"इस क़दम से महिला क्रिकेट की स्थिति में सुधार हुआ है. वो मैच भी ज़्यादा खेल रही हैं और बाहर भी जा रही हैं. बीसीसीआई के पास पैसा ज़्यादा है तो महिला क्रिकेट पर पर ख़र्च भी ज़्यादा हो रहा है."

वहीं, पूर्व क्रिकेटर और स्टेट कोच ख्याती गुलानी कहती हैं, "बीसीसीआई किसी अन्य संस्थान या आयोग के तहत नहीं आना चाहता. वो अपने नियम क़ानून अपने अनुसार बनाना चाहता है. इसलिए इतने लंबे समय तक उसकी कॉमनवेल्थ खेलों से दूरी रही थी. पर आज वो उस दायरे से बाहर निकल रहा है. ये अच्छे संकेत हैं."

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