प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रयागराज के अंदावा में एक रैली को संबोधित किया. इस दौरान वे कांग्रेस पर खूब बरसे. इससे पहले पीएम मोदी ने यहां पर कुंभ कमांड और कंट्रोल सेंटर का लोकार्पण किया. पीएम इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल राम नाइक संगम तट पर गंगा पूजन में शामिल हुए
गांधी परिवार के गढ़ से कांग्रेस पर बोला हमला
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के गढ़ रायबरेली पहुंचे. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा उनसे पहले भी नेहरू-गांधी परिवार का राजनीतिक दुर्ग रहे रायबरेली का पीएम मोदी का यह पहला दौरा था. रायबरेली पहुंचने पर पीएम मोदी ने मॉडर्न कोच फैक्ट्री का निरीक्षण किया. प्रधानमंत्री ने यहां पर 1100 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण तथा शिलान्यास किया.
पीएम मोदी ने इसके बाद यहां पर एक जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. रक्षा सौदे पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने वायुसेना को कभी मजबूत नहीं होने दिया. रक्षा सौदे के मामले में कांग्रेस का इतिहास क्वात्रोची मामा का रहा और कुछ दिन पहले एक और आरोपी मिशेल चाचा को लाया गया है और हमने देखा है कि कांग्रेस कैसे इनको बचाने के लिए अपना वकील अदालत में भेजी. कांग्रेस क्या इसलिए भड़की हुई है क्योंकि बीजेपी सरकार जो रक्षा सौदे कर रही उसमें क्वात्रोची मामा और मिशेल अंकल नहीं हैं.
उल्लेखनीय है कि रेलवे ने कुछ महीने पहले ही प्रस्ताव दिया था कि वह ऐसे देशों के लिए बुलेट ट्रेन के डिब्बे बनाने और निर्यात करने को इच्छुक है, जो तेज रफ्तार गलियारे का निर्माण कर रहे हैं. इस कारखाने को लेकर पहले ही कई देश अपनी रूचि दिखा चुके हैं. कोरिया, जापान, जर्मनी, चीन और ताइवान के अधिकारी कारखाने का दौरा कर चुके हैं.
रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि कई देश कम उत्पादन लागत की वजह से भारत का इस्तेमाल विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में कर सकते हैं. प्रधानमंत्री के दौरे के बारे में अधिकारी ने कहा, 'यह हमारे लिए बहुत गर्व की बात है. प्रधानमंत्री का यहां आना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संदेश जाएगा कि भारत उसके कारखानों में तैयार डिब्बों के निर्यात के लिए प्रतिस्पर्धी बाजार में उतर रहा है.'
बता दें कि रायबरेली से सांसद सोनिया गांधी वर्ष 2014 में इस सीट से एक बार फिर सांसद बनने के बाद स्वास्थ्य कारणों से बहुत कम ही बार रायबरेली आ सकी हैं. पिछले साल हुए राज्य विधानसभा चुनाव में भी सेहत सम्बन्धी समस्याओं के कारण सोनिया प्रचार नहीं कर सकी थीं.
Monday, December 17, 2018
Wednesday, December 5, 2018
बुलंदशहर हिंसा : यूपी के मंत्री समेत विपक्ष ने योगी को घेरा
बुलंदशहर घटना पर उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सहयोगी मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सवाल उठाते हुए कहा है कि विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल के जो लोग सड़क पर आए, उनको पहले एसपी के पास जाना चाहिए था, लेकिन इन लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से दंगा कराने की योजना बना रखी थी.
मंत्री राजभर ने कहा कि प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़काने की साजिश थी. क्योंकि जब चुनाव नजदीक आते हैं तो हिंदू-मुसलमान में दंगा कराने की साजिश की जाती है, भगवान राम याद आ जाते हैं, मंदिर-मस्जिद याद आ जाता है.
मंत्री के मुताबिक, अब विश्व हिंदू परिषद के लोग धर्म सभा करते हैं. कानून को नहीं मानते हैं. इसके पीछे उनकी मंशा थी कि हिंदू-मुसलमान को भड़काओ और चुनावों में वोट हासिल करो. विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और बीजेपी के लोग साजिश के तहत काम करवाते हैं. सहयोगीदल होने के नाते हम सही बात बोलते हैं.
ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि अखलाक मामले में जांच कराई जा चुकी है. लेकिन बुलंदशहर में जो घटना घटी, उसकी एफआईआर में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और बीजेपी के लोगों के नाम हैं. इससे साफ साबित होता है यह वारदात योजनाबद्ध तरीके से की गई. इंस्पेक्टर सुबोध के साथ ही एक आम व्यक्ति की भी मौत हुई है. जिसके जिम्मेदार यही लोग हैं. यह लोग प्रदेश का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं.
राजभर ने कहा कि बुलंदशहर में बड़ी संख्या में मुस्लिम जुट रहे हैं और सड़क से ही आवागमन है. जाम होगा तो दोनों तरफ से विवाद होने की आशंका है.
आगे उन्होंने कहा कि आज बीजेपी मंदिर के मुद्दे पर हल्ला कर रही है. अभी अयोध्या में धर्मसभा हुई. अगर कानून को मानते तो मामला कोर्ट में विचाराधीन है. कोर्ट का आदेश आने दो. मंदिर-मस्जिद में से जिसके भी पक्ष में फैसला आएगा, बन जाएगा.
कपिल सिब्बल बोले- यूपी में भय का माहौल
कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि योगी आदित्यनाथ तेलंगाना और राजस्थान में जा कर विष भरा भाषण देते हैं. उन्होंने कहा कि यूपी में कानून-व्यवस्था नाम की चीज नहीं है. भय का माहौल है. ये लोग सरकार चलाने नहीं लोकतंत्र को काबू में करने के लिए सत्ता में आए हैं.
ओवैसी ने कहा- यूपी में इंसानों की जिंदगी सस्ती
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि यूपी में गोरक्षा के नाम पर आतंक मचाने वालों की बीजेपी और आरएसएस रक्षा करती है. उन्होंने कहा कि यूपी में जानवरों की जिंदगी की कीमत इंसानों से ज्यादा है, इसलिए वहां पर ऐसी दुर्घटना हुई. अगर इंसान जिंदा रहे तो ही जानवरों को बचा पाएंगे.
हिंदू महासभा का योगी पर तंज- जब रोम जल रहा था, तो नीरो बांसुरी बजा रहा था
वहीं, बुलंदशहर की पूरी घटना पर हिंदू महासभा समेत विपक्षी दलों ने योगी सरकार पर निशाना साधा है. हिंदू महासभा ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को जंगलराज करार दिया.
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने आज तक से बातचीत करते हुए कहा, 'इस तरह इतनी अराजकता बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रदेश में आग लगी है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी लेजर शो देख रहे हैं.'
मंत्री राजभर ने कहा कि प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़काने की साजिश थी. क्योंकि जब चुनाव नजदीक आते हैं तो हिंदू-मुसलमान में दंगा कराने की साजिश की जाती है, भगवान राम याद आ जाते हैं, मंदिर-मस्जिद याद आ जाता है.
मंत्री के मुताबिक, अब विश्व हिंदू परिषद के लोग धर्म सभा करते हैं. कानून को नहीं मानते हैं. इसके पीछे उनकी मंशा थी कि हिंदू-मुसलमान को भड़काओ और चुनावों में वोट हासिल करो. विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और बीजेपी के लोग साजिश के तहत काम करवाते हैं. सहयोगीदल होने के नाते हम सही बात बोलते हैं.
ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि अखलाक मामले में जांच कराई जा चुकी है. लेकिन बुलंदशहर में जो घटना घटी, उसकी एफआईआर में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और बीजेपी के लोगों के नाम हैं. इससे साफ साबित होता है यह वारदात योजनाबद्ध तरीके से की गई. इंस्पेक्टर सुबोध के साथ ही एक आम व्यक्ति की भी मौत हुई है. जिसके जिम्मेदार यही लोग हैं. यह लोग प्रदेश का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं.
राजभर ने कहा कि बुलंदशहर में बड़ी संख्या में मुस्लिम जुट रहे हैं और सड़क से ही आवागमन है. जाम होगा तो दोनों तरफ से विवाद होने की आशंका है.
आगे उन्होंने कहा कि आज बीजेपी मंदिर के मुद्दे पर हल्ला कर रही है. अभी अयोध्या में धर्मसभा हुई. अगर कानून को मानते तो मामला कोर्ट में विचाराधीन है. कोर्ट का आदेश आने दो. मंदिर-मस्जिद में से जिसके भी पक्ष में फैसला आएगा, बन जाएगा.
कपिल सिब्बल बोले- यूपी में भय का माहौल
कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि योगी आदित्यनाथ तेलंगाना और राजस्थान में जा कर विष भरा भाषण देते हैं. उन्होंने कहा कि यूपी में कानून-व्यवस्था नाम की चीज नहीं है. भय का माहौल है. ये लोग सरकार चलाने नहीं लोकतंत्र को काबू में करने के लिए सत्ता में आए हैं.
ओवैसी ने कहा- यूपी में इंसानों की जिंदगी सस्ती
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि यूपी में गोरक्षा के नाम पर आतंक मचाने वालों की बीजेपी और आरएसएस रक्षा करती है. उन्होंने कहा कि यूपी में जानवरों की जिंदगी की कीमत इंसानों से ज्यादा है, इसलिए वहां पर ऐसी दुर्घटना हुई. अगर इंसान जिंदा रहे तो ही जानवरों को बचा पाएंगे.
हिंदू महासभा का योगी पर तंज- जब रोम जल रहा था, तो नीरो बांसुरी बजा रहा था
वहीं, बुलंदशहर की पूरी घटना पर हिंदू महासभा समेत विपक्षी दलों ने योगी सरकार पर निशाना साधा है. हिंदू महासभा ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को जंगलराज करार दिया.
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने आज तक से बातचीत करते हुए कहा, 'इस तरह इतनी अराजकता बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रदेश में आग लगी है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी लेजर शो देख रहे हैं.'
Monday, November 19, 2018
अमृतसर हमले से लौटी 40 साल पुरानी दहशत
पंजाब के अमृतसर जिले के राजसांसी इलाके में रविवार को निरंकारी सत्संग में ग्रेनेड अटैक हुआ. इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 अन्य घायल हुए हैं.
यह ग्रेनेड हमला अमृतसर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित आदिलवाल गांव में निरंकारी पंथ के सत्संग भवन में हुआ है. इस हमले के पीछे हुई साजिश की परतें खुलती जा रही हैं. पंजाब पुलिस के सूत्रों की मानें तो हमले के पीछे खालिस्तानी समर्थकों का हाथ है, जिन्होंने लोकल लड़कों को बहकाकर इस हमले को अंजाम दिया. इसमें आईएसआई कनेक्शन भी सामने आ रहा है.
ऐसा पहली बार नहीं है, जब खालिस्तानी समर्थकों का नाम इस तरह के हमले में आया है. 40 साल पहले भी सिख समुदाय से जुड़े कुछ समूहों ने अमृतसर में निरंकारी भवन को निशाना बनाया था. 13 अप्रैल, 1978 को बैसाखी के मौके पर ये हमला किया गया था, जिसके बाद अकाली और निरंकारी समूहों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 13 अकाली मारे गए थे.
इस खूनी संघर्ष के विरोध में जब अकालियों ने प्रदर्शन किया था तो उस दौरान आतंकी जरनैल सिंह भिडंरावाला इस मोर्चे में शामिल हुआ था. माना जाता है कि इस घटना के बाद से ही पंजाब में आतंकवाद ने पैर पसारने शुरू किए थे.
ताजा हमला रविवार (18 नवंबर) को उस वक्त हुआ, जब लोग प्रार्थना के लिए एकत्र हुए थे. वहां करीब 200 लोग मौजूद थे. देश-विदेश में निरंकारी अनुयायियों की संख्या लाखों में है. इसका मुख्यालय दिल्ली में है.
में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामले में आज सर्वोच्च अदालत में सुनवाई होनी थी, लेकिन अब ये 26 नवंबर तक टल गई है. इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है, इसे पूर्व कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने दायर किया है.
आपको बता दें कि इस मामले में जांच कर रही एसआईटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तब गुजरात के मुख्यमंत्री) को क्लीन चिट दे दी थी. इसी फैसले के खिलाफ याचिका डाली गई है.
13 नवंबर को हुई सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने इस याचिका को मंजूर किया था. मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट जस्टिस ए. एम खानविलकर और दीपक गुप्ता नेएसआईटी रिपोर्ट का अध्ययन करने की बात कही थी.
आपको बता दें कि 2008 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी औरअन्य लोगों को क्लीन चिट दी थी. जिसके बाद इस मामले में उनके खिलाफ कोई पुख्तासबूत ना होने की बात कही थी.
यह ग्रेनेड हमला अमृतसर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित आदिलवाल गांव में निरंकारी पंथ के सत्संग भवन में हुआ है. इस हमले के पीछे हुई साजिश की परतें खुलती जा रही हैं. पंजाब पुलिस के सूत्रों की मानें तो हमले के पीछे खालिस्तानी समर्थकों का हाथ है, जिन्होंने लोकल लड़कों को बहकाकर इस हमले को अंजाम दिया. इसमें आईएसआई कनेक्शन भी सामने आ रहा है.
ऐसा पहली बार नहीं है, जब खालिस्तानी समर्थकों का नाम इस तरह के हमले में आया है. 40 साल पहले भी सिख समुदाय से जुड़े कुछ समूहों ने अमृतसर में निरंकारी भवन को निशाना बनाया था. 13 अप्रैल, 1978 को बैसाखी के मौके पर ये हमला किया गया था, जिसके बाद अकाली और निरंकारी समूहों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 13 अकाली मारे गए थे.
इस खूनी संघर्ष के विरोध में जब अकालियों ने प्रदर्शन किया था तो उस दौरान आतंकी जरनैल सिंह भिडंरावाला इस मोर्चे में शामिल हुआ था. माना जाता है कि इस घटना के बाद से ही पंजाब में आतंकवाद ने पैर पसारने शुरू किए थे.
ताजा हमला रविवार (18 नवंबर) को उस वक्त हुआ, जब लोग प्रार्थना के लिए एकत्र हुए थे. वहां करीब 200 लोग मौजूद थे. देश-विदेश में निरंकारी अनुयायियों की संख्या लाखों में है. इसका मुख्यालय दिल्ली में है.
में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामले में आज सर्वोच्च अदालत में सुनवाई होनी थी, लेकिन अब ये 26 नवंबर तक टल गई है. इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है, इसे पूर्व कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने दायर किया है.
आपको बता दें कि इस मामले में जांच कर रही एसआईटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तब गुजरात के मुख्यमंत्री) को क्लीन चिट दे दी थी. इसी फैसले के खिलाफ याचिका डाली गई है.
13 नवंबर को हुई सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने इस याचिका को मंजूर किया था. मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट जस्टिस ए. एम खानविलकर और दीपक गुप्ता नेएसआईटी रिपोर्ट का अध्ययन करने की बात कही थी.
आपको बता दें कि 2008 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी औरअन्य लोगों को क्लीन चिट दी थी. जिसके बाद इस मामले में उनके खिलाफ कोई पुख्तासबूत ना होने की बात कही थी.
Sunday, November 11, 2018
'पड़ोसी दुश्मन ही सही पर कुछ मामलों में हम जैसा है'
मुझे आज तक समझ नहीं आया कि जितने भी धर्म आधारित गुट और सियासी संस्थाएं हैं उन्हें एक दूसरे का दुश्मन होने के बावजूद एक ही विचारधारा के चश्मे से पानी पीने में कोई आपत्ति क्यों नहीं?
मसलन, लिबरल और सेक्युलर सोच हिंदू उग्रवादियों के नज़दीक भी देशद्रोह के बराबर है और मुसलमान अतिवादी भी उन्हें गद्दार और धर्म का दुश्मन समझकर नफ़रत करते हैं.
सेक्युलर तालीम हिंदु और मुसलमान उग्रवादी बड़े शौक से हासिल करते हैं. एक से एक नया गैजेट, गाड़ी, सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करने में उन्हें किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं.
कोई उग्रवादी मोबाइल फ़ोन का नया मॉडल लेने से कभी मना नहीं करेगा. मगर नई सोच को अपनाना छोड़ उसे सुनने से भी इनकार करके उल्टा आपके मुंह पर हाथ रख देगा.
पश्चिम में रेनेसां पीरियड में जहां और चीजें आईं, वहीं वैज्ञानिक सोच और शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटीज़ भी तेज़ी से खुलनी शुरू हुईं.
रफ़्ता-रफ़्ता यूनिवर्सिटी ऐसी जगह कहलाने लगीं जहां नई सोच की कोपलें फूटती हैं. कोई भी विद्यार्थी या गुरू किसी भी विषय पर कोई भी सवाल उठा सकता है और जवाब चाटे, थप्पड़ या गाली से नहीं बल्कि दलील से देना पड़ता है.
मगर दुनिया लगता है कि उसी ज़माने की ओर धकेली जा रही है जिससे जान बचाकर भागी थी. फ़ासिज़्म राजनीति को लपेट में लेने के बाद अब यूनिवर्सिटिज़ से भी ऑक्सिजन ख़त्म कर रहा है.
रफ़्ता-रफ़्ता यूनिवर्सिटी को भी धार्मिक मदरसों में ढालने की कोशिश हो रही है और सवाल पूछना जुर्म बन रहा है.
पाकिस्तान में आपको याद होगा कि किसी तरह एक सेक्युलर नेता ख़ान अब्दुर वली ख़ान के नाम पर बनी यूनिवर्सिटी में पिछले वर्ष एक छात्र मिशाल ख़ान को उन्हीं के साथी लड़कों ने तौहीन-ए-रिसालत का झूठा इल्ज़ाम लगाकर मार डाला.
उनके कत्ल की जुर्म में सिर्फ पांच लोग इस वक़्त जेल में हैं. बाकी छूट गए.
डॉक्टर मुबारक अली पाकिस्तान के जाने माने इतिहासकार हैं मगर कोई भी विश्वविद्यालय उन्हें पढ़ाने का काम देते हुए डरती हैं. डॉक्टर परवेज़ हूद भाई को धार्मिक गुट शक की नज़र से देखते हैं.
सरकारी यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले ज़्यादातर प्रोफ़ेसर न सवाल करने की इजाज़त देते हैं. न हर सवाल का जवाब खुलकर समझाते हैं.
ऐसे में जब सीमापार से ये ख़बर आती है कि प्रोफे़सर रामचंद्र गुहा जैसे जाने माने इतिहासकार ने धमकियां मिलने पर अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ाने से इनक़ार कर दिया है या दिल्ली यूनिवर्सिटी में पोस्ट ग्रेजुएट क्लासों में से प्रोफेसर कांचा इलैया की पुस्तकें हटा दी गई हैं. या किसी यूनिवर्सिटी में अब कोई सेमिनार या वर्कशॉप ऐसा नहीं हो सकता कि जिससे सरकार की नाराज़गी का ख़तरा हो तो मुझे बड़ा आनंद मिलता है.
ये सोच सोच कि हम अकेले नहीं हैं. पड़ोसी दुश्मन ही सही पर, उसकी दुसराहट इतनी बुरी भी नहीं.
मसलन, लिबरल और सेक्युलर सोच हिंदू उग्रवादियों के नज़दीक भी देशद्रोह के बराबर है और मुसलमान अतिवादी भी उन्हें गद्दार और धर्म का दुश्मन समझकर नफ़रत करते हैं.
सेक्युलर तालीम हिंदु और मुसलमान उग्रवादी बड़े शौक से हासिल करते हैं. एक से एक नया गैजेट, गाड़ी, सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करने में उन्हें किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं.
कोई उग्रवादी मोबाइल फ़ोन का नया मॉडल लेने से कभी मना नहीं करेगा. मगर नई सोच को अपनाना छोड़ उसे सुनने से भी इनकार करके उल्टा आपके मुंह पर हाथ रख देगा.
पश्चिम में रेनेसां पीरियड में जहां और चीजें आईं, वहीं वैज्ञानिक सोच और शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटीज़ भी तेज़ी से खुलनी शुरू हुईं.
रफ़्ता-रफ़्ता यूनिवर्सिटी ऐसी जगह कहलाने लगीं जहां नई सोच की कोपलें फूटती हैं. कोई भी विद्यार्थी या गुरू किसी भी विषय पर कोई भी सवाल उठा सकता है और जवाब चाटे, थप्पड़ या गाली से नहीं बल्कि दलील से देना पड़ता है.
मगर दुनिया लगता है कि उसी ज़माने की ओर धकेली जा रही है जिससे जान बचाकर भागी थी. फ़ासिज़्म राजनीति को लपेट में लेने के बाद अब यूनिवर्सिटिज़ से भी ऑक्सिजन ख़त्म कर रहा है.
रफ़्ता-रफ़्ता यूनिवर्सिटी को भी धार्मिक मदरसों में ढालने की कोशिश हो रही है और सवाल पूछना जुर्म बन रहा है.
पाकिस्तान में आपको याद होगा कि किसी तरह एक सेक्युलर नेता ख़ान अब्दुर वली ख़ान के नाम पर बनी यूनिवर्सिटी में पिछले वर्ष एक छात्र मिशाल ख़ान को उन्हीं के साथी लड़कों ने तौहीन-ए-रिसालत का झूठा इल्ज़ाम लगाकर मार डाला.
उनके कत्ल की जुर्म में सिर्फ पांच लोग इस वक़्त जेल में हैं. बाकी छूट गए.
डॉक्टर मुबारक अली पाकिस्तान के जाने माने इतिहासकार हैं मगर कोई भी विश्वविद्यालय उन्हें पढ़ाने का काम देते हुए डरती हैं. डॉक्टर परवेज़ हूद भाई को धार्मिक गुट शक की नज़र से देखते हैं.
सरकारी यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले ज़्यादातर प्रोफ़ेसर न सवाल करने की इजाज़त देते हैं. न हर सवाल का जवाब खुलकर समझाते हैं.
ऐसे में जब सीमापार से ये ख़बर आती है कि प्रोफे़सर रामचंद्र गुहा जैसे जाने माने इतिहासकार ने धमकियां मिलने पर अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ाने से इनक़ार कर दिया है या दिल्ली यूनिवर्सिटी में पोस्ट ग्रेजुएट क्लासों में से प्रोफेसर कांचा इलैया की पुस्तकें हटा दी गई हैं. या किसी यूनिवर्सिटी में अब कोई सेमिनार या वर्कशॉप ऐसा नहीं हो सकता कि जिससे सरकार की नाराज़गी का ख़तरा हो तो मुझे बड़ा आनंद मिलता है.
ये सोच सोच कि हम अकेले नहीं हैं. पड़ोसी दुश्मन ही सही पर, उसकी दुसराहट इतनी बुरी भी नहीं.
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